Saturday, 13 October 2018

अनाज बैंक ने अपनी सर्वश्रेष्ठ सेवा के तीन वर्ष पूरे किये

आज 13 अक्तूबर को विश्व के पहला अनाज बैंक ने अपनी सर्वश्रेष्ठ सेवा के तीन वर्ष पूरे किये. बुन्देलखण्ड के उरई स्थित पहले अनाज बैंक के कार्यों से प्रेरित होकर इस अवसर पर नगर के कुछ गणमान्य लोग खाताधारक के रूप में जुड़े. एक भूखे परिवार और उनके बच्चों का पेट भरने में आप भी अनाज बैंक टीम का हिस्सा बने हैं, उनको साधुवाद, उनका आभार. 
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डॉ० ए०के० सक्सेना, प्राचार्य, गाँधी महाविद्यालय, उरई 
श्री गौरव चौहान द्वारा डॉ० ऋचा सिंह राठौड़, सहायक प्राध्यापक, रक्षा अध्ययन विभाग, गाँधी महाविद्यालय, उरई
डॉ० विनीत चतुर्वेदी, सहायक प्राध्यापक, समाजशास्त्र, कालपी कॉलेज, कालपी
डॉ० विश्वप्रभा त्रिपाठी, मनोविज्ञान विभाग, गाँधी महाविद्यालय, उरई
डॉ० कंचन, सहायक प्राध्यापक, मनोविज्ञान विभाग, गाँधी महाविद्यालय, उरई
डॉ० ममता, संस्कृत विभाग, गाँधी महाविद्यालय, उरई


सदस्यता फॉर्म भरते डॉ० विनीत चतुर्वेदी 

डॉ० विनीत चतुर्वेदी के साथ डॉ० अमिता सिंह, धर्मेन्द्र कुमार 

जमाकर्ता फॉर्म देते डॉ० ए० के० सक्सेना, प्राचार्य गाँधी महाविद्यालय, उरई 

डॉ० ऋचा सिंह राठौड़, सहायक प्राध्यापक, गाँधी महाविद्यालय, उरई 

बांये से - डॉ० सुनीता गुप्ता, डॉ० विश्वप्रभा त्रिपाठी, डॉ० कंचन, डॉ० ममता
गाँधी महाविद्यालय, उरई 



Sunday, 16 September 2018

बुन्देलखण्ड की महाप्रबंधक अनाज बैंक की निदेशक मनोनीत


कोई भी भूखा न सोये की संकल्पना के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से 13 अक्टूबर 2015 में अनाज बैंक के रूप में एक पहल हुई. अपनी तीन वर्षीय अवधि में ही अनाज बैंक ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई. इस अवधि में अनाज बैंक द्वारा महज अनाज वितरण का कार्य ही नहीं किया गया वरन लगातार अपने विस्तार की ओर भी कार्य किया गया. अनाज बैंक ने वाराणसी से बाहर निकल कर देश की राजधानी दिल्ली में अपनी शाखा का विस्तार किया तो भूख से लड़ रहे बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भी अपनी शाखा को उरई में स्थापित किया. विस्तार के इसी क्रम में विश्व के पहले अनाज बैंक की कल्पना और उसके शिल्पकार विशाल भारत संस्थान के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ० राजीव कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक बैठक आहूत हुई. इस बैठक में अनाज बैंक के बुन्देलखण्ड जोन की महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह को अनाज बैंक का निदेशक मनोनीत किया गया.


अंतरराष्ट्रीय अनाज परिषद का गठन
बैठक में अनाज बैंक के विस्तार पर चर्चा करते हुए इसे वैश्विक आधार प्रदान किया गया. इसके चलते अंतरराष्ट्रीय अनाज परिषद् एवं राष्ट्रीय अनाज परिषद् का भी गठन किया गया. अनाज बैंक के प्रति निष्ठा एवं समर्पण को देखते हुए संस्थान के अध्यक्ष एवं अनाज बैंक के चेयरमैन डॉ० राजीव श्रीवास्तव ने डॉ० अमिता सिंह को अनाज बैंक का निदेशक {प्रबंधन एवं विस्तार} मनोनीत किया. इस महती जिम्मेवारी के बाद डॉ० अमिता सिंह पूरे देश के अनाज बैंक के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगी. इसी के साथ डॉ० अमिता सिंह अनाज बैंक की केन्द्रीय टीम के रूप में भी कार्य करेंगी.


गरीब को अनाज का मुफ्त वितरण
अनाज बैंक विशुद्ध रूप से एक बैंक की भांति कार्य करता है. यहाँ दानदाताओं और दान प्राप्तकर्ताओं का एक खाता खोला जाता है. समाज के सहयोगीजन स्वेच्छा से अनाज बैंक में विभिन्न प्रकार के अनाज के द्वारा सहयोग दिया करते हैं. समाज से प्राप्त सहयोगी अनाज को अनाज बैंक द्वारा भौतिक सत्यापन के बाद चिन्हित गरीबों को प्रतिमाह वितरित किया जाता है. इसके लिए अनाज बैंक द्वारा किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता है. अनाज बैंक की इस अनूठी संकल्पना से उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और बुंदेलखंड इलाके में गरीबों एवं वंचितों में आशा की एक नयी किरण ने जन्म लिया है.

बुन्देलखण्ड की उरई शाखा ने एक वर्ष से कम समय में ही अपने कार्य की पारदर्शिता और ईमानदारी से अनाज बैंक की केन्द्रीय टीम के मध्य विश्वसनीयता बनाई. इसी का सुखद परिणाम यह हुआ कि अनाज बैंक, बुन्देलखण्ड जोन की महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह जी को निदेशक की जिम्मेवारी प्रदान की गई. उनके निर्देशन में अपेक्षा है कि न केवल बुन्देलखण्ड वरन देश के तमाम हिस्सों से भूख सम्बन्धी समस्या का समाधान होगा और कोई भी भूखा न सोये का उद्देश्य प्राप्त किया जा सकेगा.