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Monday, 11 March 2019

सकारात्मकता के साथ व्यावहारिक कार्य कर रहा है अनाज बैंक


अनाज बैंक के बारे में पिछले काफी समय से सुन रहे थे. आज यहाँ आकर देखा तो एहसास हुआ कि यह व्यावहारिक रूप से समाज की गरीब महिलाओं के लिए काम कर रहा है. कोई भूखा न सोये के उद्देश्य के साथ अनाज बैंक अपने नाम को सार्थक कर रहा है. इन महिलाओं से मिलकर लगा कि यही सच्ची सेवा, सकारात्मक कार्य है. उक्त विचार अनाज बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित मार्च माह के पहले वितरण पर जनपद की प्रसिद्द चिकित्सक डॉ० छवि जायसवाल द्वारा व्यक्त किये गए. उन्होंने आगे कहा कि बिना किसी सरकारी सहायता के जन-सहयोग द्वारा इस तरह का कार्य वास्तव में सराहनीय ही नहीं वरन अनुकरणीय है. उन्हें आज अनाज बैंक से जुड़कर सकारात्मक सामाजिक कार्य करने की अनुभूति हो रही है. डॉ० छवि जायसवाल ने इस अवसर पर अनाज बैंक में जमाकर्ता के रूप में अपना खाता भी खुलवाया. 


विगत कई माह से अनाज बैंक की लाभार्थी शकीला ने स्वैच्छिक रूप से अपना सहयोग देने की इच्छा ज़ाहिर करती रही हैं. आज के वितरण में उन्होंने भी अपना सहयोग देते हुए बताया कि वह अपनी पारिवारिक स्थिति के चलते अनेक समस्याओं का सामना कर रही थी. उसी विपत्ति भरे दौर में किसी ने उसे अनाज बैंक के बारे में, अमिता दीदी के बार में बताया. यहाँ आकर न केवल अनाज की सहायता की गई वरन दीदी की तरफ से मानसिक संबल भी मिला. उनकी सहायता से पारिवारिक समस्याओं का समाधान मिला, उसे खुद को भी अपने पैरों पर खड़े होने का रास्ता मिला. अनाज बैंक द्वारा आज भी उसे सहयोग दिया जा रहा है, अब वह भी किसी न किसी रूप में अनाज बैंक से जुड़कर अपना योगदान देना चाहती है. बैंक से सम्बंधित कार्यों में, अनाज वितरण में एवं अनाज बैंक के अन्य सामाजिक कार्यों में वह निरन्तर सहयोग देती रहेगी. आज के वितरण में शकीला द्वारा महिलाओं को अनाज वितरण में सहयोग दिया गया. 


अनाज बैंक निदेशक डॉ० अमिता सिंह ने अनाज बैंक, उरई टीम का तथा यहाँ के सभी जमाकर्ता खातेदारों के सहयोग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्य पूरी टीम भावना के साथ किया जा रहा है. समाज के सम्मानित और सक्रिय नागरिक अपने परिजनों की स्मृति में, उनके किसी दिवस विशेष पर अब जागरूक होकर अनाज बैंक से जुड़ रहे हैं. यह बैंक के उद्देश्य की पूर्ति की दिशा में सार्थक कदम है. इस अवसर पर अनाज बैंक महाप्रबंधक और विशाल भारत संस्थान के मीडिया प्रभारी डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर के सहायक प्राध्यापक के रूप में स्थायी नियुक्ति होने पर लाभार्थी महिलाओं को मिष्ठान वितरण करवाया गया.    

इस वितरण में प्रबंधक धर्मेन्द्र कुमार, रचना मिश्रा, निशा सिंह, रागिनी, पौरिक सिंह राणावत, पौरवी सिंह राणावत, अक्षयांशी सिंह सेंगर सहित सुधा देवी, लौंगश्री, जगरानी, नसरीन, सुमिंत रानी, रामबती, शाहिदा खातून, आयशा, शमशाद, गिरजा देवी, धनकुरा आदि लाभार्थी महिलाएं उपस्थित रहीं. मार्च माह का दूसरा वितरण 17 तारीख को प्रातः दस बजे से किया जायेगा.


Sunday, 2 December 2018

भूख से लड़ाई में अनाज बैंक की भूमिका सराहनीय


विश्व का और बुन्देलखण्ड का पहला अनाज बैंक बिना किसी भेदभाव के जरूरतमंद महिलाओं को सकारात्मक ढंग से सहयोग कर रहा है, यह हम सभी के लिए प्रेरणा लेने वाली बात है. आज जबकि छोटे-छोटे से कामों में भी जाति, धर्म, परिवार आदि देखे जाने लगते हैं ऐसे समय में अनाज बैंक ने निस्वार्थ भावना से अनाज वितरण का कार्य जारी रखा है. इसके लिए सभी सदस्य बधाई के पात्र हैं. अनाज बैंक का उद्देश्य ही महान है कि कोई भूखा न सोये और इसके द्वारा वह शासन और प्रशासन की मदद ही कर रहा है. गरीब, मजबूर महिलाओं की भूख मिटाने के लिए अनाज बैंक का प्रयास सराहनीय है. उक्त विचार अनाज बैंक, उरई के दिसम्बर माह के पहले वितरण पर विशाल भारत संस्थान मीडिया प्रभारी डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने व्यक्त किये. उन्होंने आगे कहा कि बिना किसी सरकारी मदद के सिर्फ जनसहयोग से ऐसे वितरण कार्यक्रम का नियमित रूप से संचालित होना समाज को सन्देश देता है कि अभी समाज में अच्छे लोगों की कमी नहीं हुई है.


इस अवसर पर अनाज बैंक की निदेशक डॉ० अमिता सिंह ने बताया कि पिछले एक साल से अधिक समय में उरई अनाज बैंक ने अपनी पारदर्शिता से केन्द्रीय टीम के सामने विश्वास बनाया है. इसमें उन सभी का भी बहुत बड़ा सहयोग है जो लोग जमाकर्ता रूप में अनाज बैंक से जुड़े हैं. बिना उनके सहयोग के अनाज बैंक अपने कार्य को पूरा नहीं कर सकता है. अनाज बैंक का लगातार प्रयास यही है कि जरूरतमंद महिलाओं को सिर्फ अनाज आटा देकर सहायता जैसी खानापूर्ति न की जाये बल्कि सक्षम महिलाओं को स्वावलंबी बनाये जाने के प्रयास भी किये जा रहे हैं. उन्हें इस बात की ख़ुशी है कि पिछले कुछ समय ये ये प्रयास भी फलीभूत हुए हैं.


अनाज बैंक से विगत कई माह से जुडी एवं सहायता प्राप्त करती सीमा शर्मा ने बताया कि अनाज बैंक टीम की मदद से वे अगले माह से अपना कार्य शुरू करने जा रही हैं. उन्होंने सभी सक्षम महिलाओं को आत्मनिर्भर होने के लिए प्रोत्साहित करते हुए अनाज बैंक का आभार व्यक्त किया. उनके द्वारा वितरण में सहयोग भी प्रदान किया गया. ध्यातव्य है कि विगत माह में अनाज बैंक निदेशक डॉ० अमिता सिंह द्वारा सीमा की सहायता ब्यूटी पार्लर खोलने के सम्बन्ध में की गई थी.


इस वितरण में तीन महिलाओं को आकस्मिक सहायता प्रदान करते हुए पांच किलो आटा प्रदान किया गया. ये तीनों महिलायें अकेली रह रही हैं और उनके आस-पड़ोस वालों से जानकारी प्राप्त हुई कि विगत तीन दिनों से उनको कहीं से भोजन नहीं मिल सका है. वितरण में रामरती, विमला, चंदा, हमीदन, उदयश्री, फातिमा, सावित्री देवी, बेटी बाई, नसरीन, रामकुंवर, सुमन देवी, शमशाद आदि लाभार्थी महिलाओं सहित सीमा शर्मा, धर्मेन्द्र कुमार, रोहित ठाकुर, जीनत परवीन सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे.



Tuesday, 23 October 2018

भूख से लड़ाई में अनाज बैंक की सराहनीय भूमिका


भूख से लड़ाई में अनाज बैंक की सराहनीय भूमिका : सुनील चौहान
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कोई भी भूखा न सोये के उद्देश्य के साथ संचालित अनाज बैंक अत्यंत सराहनीय कार्य कर रहा है. वृद्ध, मजबूर  महिलाओं को अनाज वितरण करके अनाज बैंक पवित्र भावना के साथ सामाजिक कार्य कर रहा है. उक्त विचार बुन्देलखण्ड के पहले अनाज बैंक के जोनल कार्यालय, उरई में अक्टूबर माह के दूसरे अनाज वितरण के दौरान एसएस कंप्यूटर के सुनील सिंह चौहान द्वारा व्यक्त किये. उन्होंने अनाज बैंक के अनाज वितरण व्यवस्था को देखकर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बुन्देलखण्ड में समय के साथ भूख एक समस्या बनती जा रही है. इसके साथ-साथ समाज में वृद्धजनों के प्रति संवेदनहीनता ने भी स्थिति ख़राब की है. ऐसे में वृद्ध महिलाओं के जीवनयापन का संकट पैदा हो जाता है. अनाज बैंक के इस कदम से उन महिलाओं को नया जीवन मिला है.


इस वितरण के अवसर पर नगर की समाजसेवी अभिलाषा यादव द्वारा सौ किलो चीनी के साथ जमाकर्ता के रूप में खाता खुलवाया गया. उन्होंने कहा कि अनाज बैंक नियमित रूप से अपना कार्य कर रहा है. उनका सहयोग भूख के खिलाफ चल रहे आन्दोलन में एक छोटा सा कदम है. इसके द्वारा आगामी माह होने वाले दीपावली के पावन पर्व के लिए महिलाओं में ख़ुशी लाने का एक प्रयास है.

अनाज बैंक की निदेशक डॉ० अमिता सिंह ने अनाज बैंक की भावी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि अगले माह अनाज बैंक की उरई शाखा अपना एक वर्ष पूर्ण कर रही है. इस अवसर पर महिलाओं को अनाज वितरण, उनके स्वावलंबन के साथ-साथ ऐसे बच्चों को भी गोद लेने का विचार है जो बेसहारा हैं. अनाज बैंक उनकी शिक्षा, रहन-सहन, खान-पान की जिम्मेवारी उठाएगा. इस सम्बन्ध में अनाज बैंक के चेयरमैन और संस्थापक डॉ० राजीव श्रीवास्तव से विस्तार में चर्चा हुई और उनकी सहमति इस सम्बन्ध में प्राप्त हुई.

आज के वितरण में लक्ष्मी, किरण, परवीन, सुशीला, जीनत, मीना, गुलिश्मा आदि सहित लगभग नब्बे महिलाओं को अनाज वितरित किया गया. इस वितरण में प्रमोद पोरवाल, भरत  सेठ, पौरवी राणावत, उदित यादव, धर्मेन्द्र कुमार, रोहित ठाकुर, डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर आदि ने भी सहयोग किया. अगला वितरण एक नवम्बर को होगा. गत वर्ष इसी दिन उरई में अनाज बैंक की शुरुआत हुई थी.

Sunday, 16 September 2018

बुन्देलखण्ड की महाप्रबंधक अनाज बैंक की निदेशक मनोनीत


कोई भी भूखा न सोये की संकल्पना के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से 13 अक्टूबर 2015 में अनाज बैंक के रूप में एक पहल हुई. अपनी तीन वर्षीय अवधि में ही अनाज बैंक ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई. इस अवधि में अनाज बैंक द्वारा महज अनाज वितरण का कार्य ही नहीं किया गया वरन लगातार अपने विस्तार की ओर भी कार्य किया गया. अनाज बैंक ने वाराणसी से बाहर निकल कर देश की राजधानी दिल्ली में अपनी शाखा का विस्तार किया तो भूख से लड़ रहे बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भी अपनी शाखा को उरई में स्थापित किया. विस्तार के इसी क्रम में विश्व के पहले अनाज बैंक की कल्पना और उसके शिल्पकार विशाल भारत संस्थान के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ० राजीव कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक बैठक आहूत हुई. इस बैठक में अनाज बैंक के बुन्देलखण्ड जोन की महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह को अनाज बैंक का निदेशक मनोनीत किया गया.


अंतरराष्ट्रीय अनाज परिषद का गठन
बैठक में अनाज बैंक के विस्तार पर चर्चा करते हुए इसे वैश्विक आधार प्रदान किया गया. इसके चलते अंतरराष्ट्रीय अनाज परिषद् एवं राष्ट्रीय अनाज परिषद् का भी गठन किया गया. अनाज बैंक के प्रति निष्ठा एवं समर्पण को देखते हुए संस्थान के अध्यक्ष एवं अनाज बैंक के चेयरमैन डॉ० राजीव श्रीवास्तव ने डॉ० अमिता सिंह को अनाज बैंक का निदेशक {प्रबंधन एवं विस्तार} मनोनीत किया. इस महती जिम्मेवारी के बाद डॉ० अमिता सिंह पूरे देश के अनाज बैंक के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगी. इसी के साथ डॉ० अमिता सिंह अनाज बैंक की केन्द्रीय टीम के रूप में भी कार्य करेंगी.


गरीब को अनाज का मुफ्त वितरण
अनाज बैंक विशुद्ध रूप से एक बैंक की भांति कार्य करता है. यहाँ दानदाताओं और दान प्राप्तकर्ताओं का एक खाता खोला जाता है. समाज के सहयोगीजन स्वेच्छा से अनाज बैंक में विभिन्न प्रकार के अनाज के द्वारा सहयोग दिया करते हैं. समाज से प्राप्त सहयोगी अनाज को अनाज बैंक द्वारा भौतिक सत्यापन के बाद चिन्हित गरीबों को प्रतिमाह वितरित किया जाता है. इसके लिए अनाज बैंक द्वारा किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता है. अनाज बैंक की इस अनूठी संकल्पना से उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और बुंदेलखंड इलाके में गरीबों एवं वंचितों में आशा की एक नयी किरण ने जन्म लिया है.

बुन्देलखण्ड की उरई शाखा ने एक वर्ष से कम समय में ही अपने कार्य की पारदर्शिता और ईमानदारी से अनाज बैंक की केन्द्रीय टीम के मध्य विश्वसनीयता बनाई. इसी का सुखद परिणाम यह हुआ कि अनाज बैंक, बुन्देलखण्ड जोन की महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह जी को निदेशक की जिम्मेवारी प्रदान की गई. उनके निर्देशन में अपेक्षा है कि न केवल बुन्देलखण्ड वरन देश के तमाम हिस्सों से भूख सम्बन्धी समस्या का समाधान होगा और कोई भी भूखा न सोये का उद्देश्य प्राप्त किया जा सकेगा.


Sunday, 9 September 2018

इन्द्रेश कुमार जी के द्वारा अनाज बैंक के क्षेत्रीय कार्यकाल का उदघाटन


कोई भी भूखा न सोये, इस उद्देश्य के साथ काशी में सबसे पहले अनाज बैंक की अवधारणा शुरू हुई। देश में ही नहीं वरन समूचे विश्व में यह अपनी तरह का पहला बैंक है जहाँ लेन-देन, जमा-निकासी सबकुछ अनाज के रूप में होता है। इस बैंक में संतोष के रूप में ब्याज मिलता है और यहाँ काम करने वालों को दुआओं-आशीर्वाद का वेतन मिलता है। यही वो ब्याज और धन है जिसके चलते इन्सान को पुण्य मिलता है। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के केन्द्रीय पदाधिकारी पूज्य इन्द्रेश कुमार जी ने व्यक्त किये। वे आज उरई स्थित अनाज बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय के उद्घाटन अवसर पर उपस्थित थे। विश्व के पहले अनाज बैंक के संस्थापक डॉ० राजीव श्रीवास्तव की प्रेरणा से बुन्देलखण्ड का पहला अनाज बैंक उरई में डॉ० अमिता सिंह के नेतृत्व में नवम्बर 2017 से कार्य कर रहा है। इसके बारे में बोलते हुए माननीय इन्द्रेश जी का कहना था कि अनाज बैंक की केन्द्रीय टीम का यह निश्चय है कि अनाज बैंक का पहले सञ्चालन देखा जायेगा। छह माह तक सुचारू रूप से कार्य करने के बाद ही उसका लोकार्पण किया जाता है। भूखों को अनाज वितरण सम्बन्ध में उनका कहना था कि हमारा देश ही नहीं वरन सम्पूर्ण विश्व भूख की समस्या से पीड़ित है। ऐसे में भरे पेट वालों की जिम्मेवारी बनती है कि वह आगे आये और एक-एक परिवार के लिए भोजन की व्यवस्था करे। बुन्देलखण्ड में भी भूख की समस्या बनी हुई है। उसी को दूर करने की दृष्टि से अनाज बैंक का सञ्चालन यहाँ किया गया है।


इससे पूर्व पूज्य इन्द्रेश जी ने अनाज बैंक का उद्घाटन माँ सरस्वती के चित्र, परम पावन नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन करके तथा फीता काटकर किया। इसके साथ ही उन्होंने हंगर कार्ड, अनाज मुद्रा और अनाज बैंक चेक का भी लोकार्पण किया। इसके द्वारा अनाज वितरण में, भोजन वितरण में और भी आसानी आएगी। मीडिया से वार्ता करते हुए पूज्य इन्द्रेश जी ने बताया कि अनाज बैंक के कार्य को देखकर यूएनओ की एक टीम ने आकर संपर्क किया और वैश्विक स्तर पर भूख की समस्या को दूर करने सम्बन्धी मॉडल स्थापित करने में सहयोग माँगा है। इसके अलावा उन्होंने मीडिया को बताया कि राष्ट्रीय मुस्लिम मंच और विशाल भारत संस्थान मिलकर अभी तक चार हजार से अधिक परिवारों को विशेष स्थिति में अनाज वितरित कर चुका है। इसके अलावा सोलह सौ परिवारों को नियमित रूप से अनाज वितरित किया जाता है। इसके साथ-साथ गरीब बेटियों के विवाह के लिए भी कार्य किया जा रहा है। अपने चार प्रकल्पों की चर्चा करते हुए इन्द्रेश जी ने बताया कि बालक-बालिकाओं के लिए शिक्षा सहायता योजना का सञ्चालन भी किया जा रहा है। इसके अंतर्गत बस्ता, किताबें, ड्रेस आदि का वितरण करने के साथ-साथ अत्यंत गरीब बच्चों की फीस की भी व्यवस्था की जाती है। अभी दो हजार से अधिक बच्चों को इससे लाभान्वित किया जा चुका है। दूसरे प्रकल्प के रूप में तलाक पीड़ित महिलाओं के लिए सहायता उपलब्ध कराइ जा रही है। इसमें नियमित दस साल तक आर्थिक सहायता करने की योजना है। अभी तक सौ से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो चुकी हैं। तीसरे विकल्प के रूप में गरीब, जरूरतमंद बेटियों के विवाह का प्रावधान है। इसमें उनको आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ अन्य जरूरत के सामान की उपलब्धता करवाई जाती है। चौथा प्रकल्प खुदाई खिदमतगार समिति की स्थापना है। बुन्देलखण्ड में जल्द ही इन प्रकल्पों के आरम्भ किये जाने पर विचार किया जायेगा।


अनाज बैंक के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ० राजीव श्रीवास्तव जी ने अपने उद्बोधन में उरई शाखा की तारीफ करते हुए कहा कि यहाँ जिस अनुशासन से कार्य हो रहा है वह प्रशंसनीय है। इसी तरह से एक नेतृत्व में, अनुशासनात्मक रूप में कार्य करने से ही सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय का आव्हान करते हुए कहा कि आप सभी प्रतिमाह अनाज बैंक को अपनी सहायता उपलब्ध करा कर गरीब परिवारों की मदद कर सकते हैं। जिस तरह का अनुशासन, कार्य के प्रति समर्पण, प्रतिबद्धता यहाँ देखने को मिल रही है उससे विशाल भारत संस्थान यहाँ शिक्षा के क्षेत्र में भी सकारात्मक कार्य करने की योजना रखता है। यदि जनपद के लोगों का सहयोग मिलेगा तो जल्द ही यहाँ माननीय इन्द्रेश जी के निर्देशन में विश्वविद्यालय आरम्भ किया जा सकता है। यदि शिक्षा व्यवस्था अच्छी होगी तो निश्चित ही रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और उससे भूख जैसी समस्या से निपटने में आसानी होगी।



अनाज बैंक बुन्देलखण्ड जोन की महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह ने कहा कि उन्होंने अनाज बैंक काशी की के कार्य और संकल्प से प्रभावित होकर अपनी छोटी बहिन अनिला सिंह की स्मृति में इसे आरम्भ किया था। यह सभी बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद है कि आज अस्सी के आसपास महिलाएं अनाज बैंक से लाभान्वित हो रही हैं। और आज हम सबको माननीय इन्द्रेश जी का आशीर्वाद भी मिला। अनाज बैंक, उरई की शाखा निरन्तर सकारात्मकता के साथ कार्य करती रहेगी और कभी भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटेगी। इस अवसर पर परम पूज्य इन्द्रेश कुमार जी ने जनपद के दो सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्मानित भी किया। इसमें विधवा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए विडो क्लब की संस्थापक कौशल्या राज जी को सम्मानित किया गया। उनके इस क्लब के माध्यम से लगभग सत्तर महिलाएं प्रति रविवार एकत्र होकर उनके विचारों का लाभ उठाती हैं। इसके साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहे डॉ० रविकांत शाक्या जी को भी सम्मानित किया गया। ट्री मैन के नाम से प्रसिद्द रविकांत लगातार न केवल पौधारोपण करवा रहे हैं वरन उनकी देखभाल भी कर रहे हैं।



कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को माननीय इन्द्रेश कुमार जी के साथ पारिवारिक बच्चों दुष्यंत सिंह राणावत, हर्षिता सिंह, पौरिक सिंह राणावत, पौरवी सिंह राणावत, वरुणा सिंह तथा उपस्थित जनप्रतिनिधियों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों ने, जनपद के बुद्धिजीवियों ने भी अनाज वितरण में सहयोग किया। उद्घाटन के पश्चात् इन्द्रेश कुमार जी द्वारा पौधारोपण करके स्मृति भी स्थापित की तथा पर्यावरण संरक्षण का सन्देश भी दिया। डॉ० राजीव जी के नेतृत्व में काशी की टीम धनञ्जय सिंह, मृदुला जायसवाल, तंजीम, नाजमा परवीन आदि सदस्य भी उपस्थित रहे। उद्घाटन के इस अवसर पर जिला संघ चालक संतोष त्रिपाठी, प्रयाग नारायण त्रिपाठी, डॉ० प्रभात कुमार, डॉ० आदित्य कुमार, डॉ० अजय सक्सेना, डॉ० राकेश नारायण द्विवेदी, डॉ० के०सी० गुप्ता, ब्रह्मानंद खरे, सुभाष चंद्रा, ब्रजभूषण सिंह मुन्नू, डॉ० राकेश द्विवेदी, सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा, कालपी विधायक नरेन्द्र सिंह जादौन, माधौगढ़ विधायक मूलचंद्र निरंजन, दिनेश चतुर्वेदी,  डॉ० प्रवीण सिंह जादौन, गणेश शंकर त्रिपाठी, ओंकार पिंडारी, धर्मेन्द्र कुमार, रोहित ठाकुर, निशा सिंह, डॉ० विश्वप्रभा त्रिपाठी, डॉ० रचना श्रीवास्तव, अरुण कुमार सिंह, दीपक कुमार, दिगंबर नारायण तिवारी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ० प्रभात कुमार ने तथा सञ्चालन डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने किया।

Monday, 6 August 2018

बुन्देलखण्ड में भूख से लड़ाई में अनाज बैंक की सराहनीय भूमिका


कोई भी भूखा न सोये के उद्देश्य के साथ संचालित अनाज बैंक का कार्य अत्यंत सराहनीय है. कमजोर, वृद्ध महिलाओं को अनाज वितरण के द्वारा उनकी मदद की पवित्र भावना समस्त सामाजिक कार्यों में सर्वोच्च है. उक्त विचार बुन्देलखण्ड के पहले अनाज बैंक के जोनल कार्यालय, उरई में अनाज वितरण के दौरान ट्री मैन के नाम से प्रसिद्द रवि शाक्या ने व्यक्त किये. अगस्त माह के पहले वितरण को भारतीय रेलवे में सेवारत और सामाजिक कार्यों में सक्रिय, सकारात्मक भूमिका निर्वहन करने वाले रवि शाक्या और गाँधी महाविद्यालय, उरई की मनोविज्ञान विभाग की डॉ० विश्वप्रभा त्रिपाठी द्वारा संपन्न किया गया. रवि शाक्या ने अनाज बैंक के कार्यों और उसकी व्यवस्था देखकर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बुन्देलखण्ड में भुखमरी की समस्या सदैव से रही है और इसके लिए समय-समय पर प्रयास भी किये गए. इसमें अनाज बैंक का प्रयास अग्रणी है. रवि शाक्या ने आगामी वितरण में सहभागिता करने और यथासंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया.


मनोविज्ञान विभाग की डॉ० विश्वप्रभा त्रिपाठी ने वितरण के दौरान विचार व्यक्त करते हुए कहा विश्व के पहले अनाज बैंक को स्थापित करने वाले डॉ० राजीव श्रीवास्तव ने पुनीत कार्य किया है. इससे भी ज्यादा पुनीत कार्य यह किया कि अनाज बैंक की एक शाखा बुन्देलखण्ड में आरम्भ की. इससे न केवल इन महिलाओं को लाभ मिल रहा है वरन अभी हाल में जलभराव के कारण पीड़ित परिवारों को भी अनाज बैंक द्वारा भोजन व्यवस्था प्रदान की गई. 


अनाज बैंक बुन्देलखण्ड जोन की महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह ने अनाज बैंक की भावी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि गत माह अनाज बैंक की केन्द्रीय टीम उरई शाखा के कार्य का अवलोकन करने आई थी. उरई शाखा के कार्य से संतुष्ट होने के कारण अनाज बैंक की अन्य शाखाओं का विस्तार बुन्देलखण्ड में किये जाने की योजना है. अभी हाल ही में अनाज बैंक के चेयरमैन और संस्थापक डॉ० राजीव श्रीवास्तव ने दिल्ली में इस सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा की और अपनी सहमति इस सम्बन्ध में प्रदान की.

अनाज बैंक की केन्द्रीय टीम के द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट से संतुष्ट होने के बाद डॉ० अमिता सिंह को राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, धर्मेन्द्र कुमार को उरई शाखा प्रबंधक और डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर को विशाल भारत संस्थान का मीडिया प्रभारी/प्रवक्ता नामित किया गया. डॉ० अमिता सिंह की बहिन अंजुला सेंगर पहले से ही अनाज बैंक की अंतर्राष्ट्रीय निदेशक हैं. 


आज के वितरण से किरण, परवीन, मानकुंवर, सुशीला, मीना, गुलिश्मा आदि सहित लगभग सत्तर महिलाओं को अनाज वितरित किया गया. इस वितरण में पौरिक राणावत, पौरवी राणावत, मनोज कुमार दिवाकर, धर्मेन्द्र कुमार, रोहित ठाकुर, डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर, फरीद बशर आदि ने भी सहयोग किया.

Friday, 3 August 2018

राजीव जी राज्य बालक अधिकार संरक्षण आयोग, उ०प्र० में सदस्य

अनाज बैंक के संस्थापक-चेयरमैन डॉ० राजीव श्रीवास्तव जी को बधाई एवं शुभकामनायें. 
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राजीव जी को राज्य बालक अधिकार संरक्षण आयोग, उ०प्र० में सदस्य के रूप में नामित किया गया है.



Friday, 27 July 2018

बारिश पीड़ित निवासियों को अनाज बैंक द्वारा भोजन वितरण


भूखे व्यक्ति को भोजन करवाना समाज में सर्वाधिक पुनीत कार्य माना जाता है। बुन्देलखण्ड के पहले अनाज बैंक द्वारा यह पुनीत कार्य माह में दो बार अनाज वितरण के द्वारा किया जा रहा है। दो दिन से हो रही जल-वृष्टि से अपना कच्चा घर, सामान, खाद्य-सामग्री आदि गँवा चुके लोगों को अनाज बैंक के उरई स्थित क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा मदद की गई। अनाज बैंक के सदस्यों द्वारा आज लहरियापुरवा के बाढ़ पीड़ितों के भोजन की व्यवस्था की गई। विगत दो दिन की बारिश में उरई के लहरियापुरवा क्षेत्र के कुछ कच्चे मकान गिर गए और बहुत से घरों में जलभराव की स्थिति बन गई। जिसके चलते वहां के निवासियों का घरों में रहना मुश्किल हो गया था। जलभराव और कच्चे मकान ध्वस्त होने से परेशान वहाँ के पुरुषों, महिलाओं, बच्चों को मोहल्लेवासियों की सहायता से लहरियापुरवा में ही राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के अंतर्गत निर्मित आशय गृह (शेल्टर हाउस) में अस्थायी तौर पर निवास की व्यवस्था की गई।



अनाज बैंक उरई को इसके बारे में जानकारी मिलते ही उसके संवेदनशील सदस्यों ने तुरंत आश्रय गृह पहुँचकर जलभराव पीड़ित नागरिकों की समस्याओं को जाना-समझा। अनाज बैंक की बुन्देलखण्ड जोन की महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह ने तत्काल अनाज बैंक को खुलवाकर आश्रय गृह में अस्थायी तौर पर निवास कर रह रहे लगभग एक सौ पचास बारिश से पीड़ित नागरिकों की भोजन व्यवस्था का प्रबंध किया। उन्होंने अनाज बैंक के परिसर में अपनी देख-रेख में भोज्य-सामग्री को बनवाकर पैकेट बनवाकर वितरण हेतु भिजवाए। उन्होंने कहा कि अनाज बैंक का मुख्य उद्देश्य किसी को भूखा न रहने देना है और उसी की दृष्टि से यह कार्य किया जा रहा है।
आश्रय गृह में रह रहे बच्चों, महिलाओं, वृद्धजनों, पुरुषों को भोजन वितरण में धर्मेन्द्र, मनोज दिवाकर, रोहित ठाकुर, अमर कुमार, डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने सहयोग किया। आश्रय गृह में शरण लिए लोगों ने इसके लिए अनाज बैंक टीम का आभार व्यक्त किया और इसे अनमोल सहायता बताया। सदस्यों ने उनको आश्वासन दिया कि उन सबकी यथासंभव मदद की जाएगी और इसी कड़ी में शाम को भी अनाज बैंक द्वारा भोजन वितरण की व्यवस्था की गई है। 






Sunday, 24 June 2018

अन्य समाजोपयोगी कार्यों का सञ्चालन भी अनाज बैंक द्वारा किया जायेगा

अनाज बैंक से लाभार्थी महिलाएं अपने आपको कमजोर, असहाय महसूस न करें। यह बैंक उनको अनाज के रूप में मदद करने के साथ-साथ उनको स्वावलंबी बनाने की दिशा में भी प्रयासरत है। इस सम्बन्ध में कई समाजसेवी लोगों से बातचीत हो रही है जो समय-समय पर विभिन्न कार्यों में आप महिलाओं को प्रशिक्षित करेंगे, इससे एक तो आपकी आय भी बढ़ेगी और आत्मविश्वास भी आएगा। ये विचार बुन्देलखण्ड के पहले अनाज बैंक की महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह ने जोनल कार्यालय, उरई में जून माह के दूसरे वितरण कार्यक्रम में 24 जून 2018 को व्यक्त किये। उनका कहना था कि समाज से बहुत से लोग बराबर अनाज बैंक से जुड़ रहे हैं, इसके बाद भी और जागरूक लोगों का बैंक से जुड़ना अपेक्षित है।


अनाज वितरण में सहयोगी रहे सामाजिक कार्यकर्त्ता डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा कि अनाज बैंक पूरी जिम्मेवारी से अपना काम कर रहा है। बिना किसी सरकारी सहायता के गणमान्य नागरिकों के सहयोग से यह पुनीत कार्य सतत संचालित है। उन्होंने कहा कि भविष्य में अनाज वितरण के अतिरिक्त अन्य समाजोपयोगी कार्यों का सञ्चालन भी अनाज बैंक द्वारा किया जायेगा, जिसमें इसकी लाभार्थी महिलाओं की सहभागिता रहेगी। 


आज के वितरण में साठ से अधिक लाभार्थी महिलाएं उपस्थित रहीं। इस अवसर पर धर्मेन्द्र, मनोज के अतिरिक्त सुशीला, अनीता, रामकुंवर, नसरीन, जगरानी, रामरती, रामदेवी आदि लाभार्थी महिलायें उपस्थित रहीं। जुलाई माह का पहला अनाज वितरण 08 तारीख, रविवार को प्रातः 9 बजे होगा।



Saturday, 26 May 2018

पारिवारिक शुभ आयोजनों पर करें सामाजिक कार्य


विश्व के पहले अनाज बैंक के संस्थापक और चेयरमैन डॉ० राजीव श्रीवास्तव की प्रेरणा से डॉ० अमिता सिंह के निर्देशन में बुन्देलखण्ड का पहला अनाज बैंक उरई में विगत नवम्बर से संचालित है। अनाज बैंक के जोनल कार्यालय, उरई में मई माह का दूसरा वितरण संपन्न हुआ। इस वितरण को डॉ० आर० पी० तिवारी, पूर्व मुख्य चिकित्साधिकारी तथा डॉ० कामना तिवारी, पूर्व मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से संपन्न किया गया। इस अवसर पर डॉ० आर० पी० तिवारी ने कहा कि अनाज बैंक का उद्देश्य बहुत ही पावन है और आज जिस उद्देश्य से यह वितरण किया जा रहा है वह और भी सुखद है। ख़ुशी का अवसर यह है कि जिन अनिला सिंह राणावत की स्मृति में उरई में अनाज बैंक संचालित है आज उनके पुत्र पौरिक सिंह का जन्मदिन है। उससे बढ़कर सुखद एहसास की बात यह है कि डॉ० अमिता सिंह ने जन्मदिन के इस अवसर पर किसी अन्य रूप में व्यय करने से बेहतर अनाज वितरण में व्यय करना समझा। निश्चित ही इतनी महिलाओं का आशीर्वाद पौरिक को सफलता, ख़ुशी प्रदान करेगा। हम सभी को भी अपने परिवार में होने वाले ऐसे अवसरों पर सामाजिकता के नाते कुछ सहायतार्थ कार्य करने चाहिए।  



इस अवसर पर डॉ० कामना तिवारी ने कहा कि महिलाओं को समझाया कि वे लोग अपने आपको कमजोर, असहाय महसूस न करें। अनाज बैंक से उनको अनाज एक मदद के रूप में भले ही मिल रहा हो किन्तु वे खुद को स्वावलंबी बनाने की दिशा में भी प्रयासरत रहें। जो भी महिलाएं किसी कार्य को करने में सक्षम हैं वे उसी को और अच्छी तरह से करने का प्रयास करें। जो महिलाएं सिलाई-कढ़ाई, अचार-पापड़ आदि बनाने का कार्य कुशलता से कर लेती हैं, वे उसके लिए अनाज बैंक की सहायता ले सकती हैं। 

अपने जन्मदिन पर पौरिक सिंह ने भी वितरण में सहयोग कर सभी का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ब्रजभूषण सिंह मुन्नू ने भी अनाज वितरण में सहयोग किया। उन्होंने कहा कि अनाज बैंक द्वारा जिस तरह का कार्य बुन्देलखण्ड में आरम्भ किया गया है, वह अवश्य ही दूसरों के लिए प्रेरणास्त्रोत है। प्रत्येक वितरण में समाज के बहुत से गणमान्य लोगों का सहयोग रहता है किन्तु यह जानकर सुखद अनुभूति हुई कि आज जन्मदिन के अवसर पर होने वाले वितरण का दायित्व डॉ० अमिता सिंह के द्वारा निर्वहन किया गया। इस तरह से भी सहायता करके समाज में वंचित लोगों को मुख्यधारा में लाने का कार्य किया जा रहा है।  


बुन्देलखण्ड के पहले अनाज बैंक की बुन्देलखण्ड जोन की महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह ने कहा कि आज अपने भतीजे के जन्मदिन पर इस वितरण को करवाने का उद्देश्य सिर्फ यही है कि हम सभी लोग इससे प्रेरित होकर आगे आकर अनाज बैंक से जुड़ें। घर-परिवार में पड़ने वाले जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ अथवा किसी अन्य सुखद मौके पर वितरण के द्वारा मजबूर, गरीबों की सहायता कर सकते हैं।  
इस अवसर पर शशि सोमेन्द्र सिंह, उर्वशी, रचना मिश्रा, आरती दुबे, वंदना श्रीवास्तव, अभिलाषा यादव, विनीता पाण्डेय, राजेश मिश्रा, उपेन्द्र सिंह, धर्मेन्द्र कुमार, डॉ० अनुज भदौरिया, गणेश शंकर त्रिपाठी, डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर, सर्वेश सिंह सहित किरण, बबीता, कमला, रानी, बतुलन, नसरीन, जगरानी, मदीना, रामरती आदि लाभार्थी महिलायें उपस्थित रहीं। जून माह का पहला अनाज वितरण 10 तारीख को प्रातः 9 बजे होगा।

Friday, 11 May 2018

मई माह का पहला अनाज वितरण कार्यक्रम संपन्न


विगत छह माह से सफलतापूर्वक तरीके से संचालित बुन्देलखण्ड के पहले अनाज बैंक के जोनल कार्यालय, उरई में मई माह का पहला वितरण संपन्न हुआ। इस वितरण को कुँवर मानवेन्द्र सिंह, पूर्व सभापति, विधान परिषद्, उ०प्र० तथा डॉ० आदित्य कुमार, पूर्व प्राचार्य, डीवी कॉलेज, उरई के द्वारा संयुक्त रूप से संपन्न किया गया। विश्व के पहले अनाज बैंक के संस्थापक और चेयरमैन डॉ० राजीव श्रीवास्तव की प्रेरणा से डॉ० अमिता सिंह के निर्देशन में संचालित अनाज बैंक द्वारा नगर की असहाय, मजबूर महिलाओं को माह में दो बार अनाज वितरण किया जाता है। इस माह के पहले वितरण में लगभग साठ महिलाओं को इसका लाभ मिला। 


इस अवसर पर कुँवर मानवेन्द्र सिंह ने उपस्थित लाभार्थी महिलाओं को समझाया कि वे लोग अपने आपको कमजोर, असहाय महसूस न करें। अनाज बैंक के रूप में एक मंच उनके साथ है जो उनको अनाज के साथ-साथ स्वावलंबी बनाने की दिशा में भी प्रयासरत है। जो भी महिलाएं किसी कार्य को करने में सक्षम हैं वे उसी को और अच्छी तरह से करने का प्रयास करें। आप सबमें अवश्य ही कोई न कोई प्रतिभा छिपी हुई है, बस वह परिस्थितियों के चलते सामने नहीं आ सकी है। बहुत सी महिलाएं सिलाई-कढ़ाई, अचार-पापड़ आदि बनाने का कार्य कुशलता से कर लेती हैं। अनाज बैंक का जोनल कार्यालय आपको इसमें मदद करेगा। इससे एक तो आपकी आय के दूसरे स्त्रोत तैयार होंगे तथा आप सबमें आत्मनिर्भरता आएगी।  


डीवी कॉलेज, उरई के पूर्व प्राचार्य डॉ० आदित्य कुमार ने वितरण पश्चात् वहाँ उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि अनाज बैंक द्वारा जिस तरह का कार्य बुन्देलखण्ड में आरम्भ किया गया है, वह अवश्य ही दूसरों के लिए प्रेरणास्त्रोत है। अनाज वितरण के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की जो सोच यहाँ देखने को मिली है, उससे विश्वास है कि सक्षम महिलायें आत्मनिर्भर बनेंगी साथ ही आने वाली पीढ़ी को भी आत्मनिर्भर बनने में मदद करेंगी। 


बुन्देलखण्ड के पहले अनाज बैंक की बुन्देलखण्ड जोन की महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह ने उपस्थित लाभार्थी महिलाओं को वहां संचालित होने वाले सिलाई प्रशिक्षण में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने को प्रोत्साहित किया। उनका कहना था कि यहाँ जल्द ही महिलाओं को प्रशिक्षित करके कपड़े के लिफाफे, झोले आदि बनवाकर बाजार में बिक्री हेतु भेजा जायेगा। इससे महिलाओं को आर्थिक मदद भी मिल सकेगी। इसके साथ-साथ उन्होंने लाभार्थी महिलाओं से अपील की कि जो महिलाएं सक्षम हैं वे कार्य करने को भी आगे आयें, जिससे आपके भीतर आत्मविश्वास पैदा हो सके। अनाज वितरण के द्वारा किसी को भूखा न सोने देने के साथ-साथ एक छोटा सा प्रयास ऐसी महिलाओं को एक मंच पर लाना भी इसका उद्देश्य है।


अनाज बैंक की स्वावलंबन सम्बन्धी योजना के अंतर्गत महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई सिखाने की व्यवस्था भी कार्यालय पर की गई है। यहाँ महिलाओं को प्रशिक्षण देने के बाद उनके बनाये गए वस्त्रों को बाजार तक भी पहुँचाया जायेगा। इससे इन महिलाओं में स्वावलंबन की भावना का विकास होगा। अनाज बैंक का उद्देश्य इन महिलाओं को सिर्फ अनाज देना भर नहीं है वरन उनको आत्मनिर्भर भी बनाना है। 


इस अवसर पर इंदु सक्सेना, धर्मेन्द्र कुमार, सुभाष चंद्रा, गणेश शंकर त्रिपाठी, सर्वेश सिंह, गिरिजा महिला बाल विकास संस्थान की संचालिका विनीता पाण्डेय, सन्देश ओर्गनाइजेशन से संजना श्रीवास्तव सहित उर्मिला, परवीन, रोशन बेगम, धनकुँवर, चमेली, बेटीबाई, नसरीन, रामकुंवर, पानकुंवर, बबीता आदि लाभार्थी महिलायें उपस्थित रहीं। मई माह का दूसरा अनाज वितरण 23 तारीख को प्रातः 10 बजे से किया जायेगा।

Monday, 23 April 2018

अनाज बैंक महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में भी प्रयासरत है


विश्व के पहले अनाज बैंक के संस्थापक और चेयरमैन डॉ० राजीव श्रीवास्तव की प्रेरणा से डॉ० अमिता सिंह के निर्देशन में संचालित बुन्देलखण्ड के पहले अनाज बैंक द्वारा अप्रैल माह का दूसरा अनाज वितरण कार्यक्रम जोनल कार्यालय, उरई में संपन्न हुआ। इस बैंक के द्वारा प्रतिमाह दो बार अनाज का वितरण किया जाता है। अप्रैल माह के दूसरे अनाज वितरण कार्यक्रम में ऑक्सफ़ोर्ड एकेडमी की निदेशक शशि सोमेन्द्र सिंह और समाजसेवी रचना मिश्रा द्वारा संयुक्त रूप से लाभार्थी महिलाओं को अनाज वितरित किया गया। इस माह के दूसरे वितरण में लगभग साठ महिलाओं को इसका लाभ मिला। अनाज वितरण के दिन आज विश्व पृथ्वी दिवस का अवसर होने के चलते उपस्थित महिलाओं को समझाया गया कि कैसे वे अपने कार्यों से पृथ्वी को सुरक्षित बनाये रख सकती हैं। शशि सोमेन्द्र सिंह ने इस अवसर पर कहा कि आज हम सबकी जिम्मेवारी है कि हम लोग अपने कार्यों को इस तरह का रखें जिससे पर्यावरण सुरक्षित रहे। हमें प्लास्टिक, पॉलीथीन आदि का उपयोग कम से कम करने की आवश्यकता है। समाजसेवी रचना मिश्रा ने उपस्थित लाभार्थी महिलाओं को समझाया कि वे लोग अपने आपको कमजोर, असहाय महसूस न करें। अनाज बैंक के रूप में एक मंच उनके साथ है जो उनको अनाज के साथ-साथ स्वावलंबी बनाने की दिशा में भी प्रयासरत है। 


बुन्देलखण्ड के पहले अनाज बैंक की बुन्देलखण्ड जोन की महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह ने उपस्थित लाभार्थी महिलाओं को वहां संचालित होने वाले सिलाई प्रशिक्षण में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने को प्रोत्साहित किया। उनका कहना था कि यहाँ जल्द ही महिलाओं को प्रशिक्षित करके कपड़े के लिफाफे, झोले आदि बनवाकर बाजार में बिक्री हेतु भेजा जायेगा। इससे एक तरफ हम सभी लोग पॉलीथीन मुक्त समाज की संकल्पना में सहयोगी बनेंगे साथ ही आप महिलाओं को आर्थिक मदद भी मिल सकेगी। युवा सामाजिक कार्यकर्ता डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा कि अनाज बैंक एक ऐसा मंच है जो ऐसी महिलाओं की प्रतिभा को भी निखारने के काम करेगा जो अपने को असहाय समझते हुए किसी काम को करने में झिझकती हैं। अनाज वितरण के द्वारा किसी को भूखा न सोने देने के साथ-साथ एक छोटा सा प्रयास ऐसी महिलाओं को एक मंच पर लाना भी इसका उद्देश्य है।  इस मौके पर बताया गया कि अनाज बैंक का लाभ पाने के लिए बहुत से आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनका सर्वेक्षण मई के पहले सप्ताह में किया जायेगा और पात्र महिलाओं को अनाज वितरण का लाभ मिलेगा।


अनाज बैंक की स्वावलंबन सम्बन्धी योजना के अंतर्गत इस माह की पहली तारीख से महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई सिखाने की व्यवस्था भी कार्यालय पर की गई है। यहाँ महिलाओं को प्रशिक्षण देने के बाद उनके बनाये गए वस्त्रों को बाजार तक भी पहुँचाया जायेगा। इससे इन महिलाओं में स्वावलंबन की भावना का विकास होगा। अनाज बैंक का उद्देश्य इन महिलाओं को सिर्फ अनाज देना भर नहीं है वरन उनको आत्मनिर्भर भी बनाना है।


इस अवसर पर धर्मेन्द्र कुमार सहित अनेक मीना, नसरीन, रामकुंवर, पानकुंवर, बबीता आदि लाभार्थी महिलाओं सहित अनेक लोग उपस्थित हुए। मई माह का पहला अनाज वितरण 11 तारीख को प्रातः 10 बजे से किया जायेगा। 




Sunday, 18 March 2018

अनाज वितरण सभी तरह के सामाजिक कार्यों से बेहतर - कुंवर मानवेन्द्र सिंह


“गरीब, मजबूर महिलाओं को एक माह में दो बार अनाज वितरण का कार्य सभी तरह के सामाजिक कार्यों से बेहतर है। ऐसा करके जहाँ एक तरफ समाजसेवा का कार्य किया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ इन महिलाओं के लिए भोजन की व्यवस्था की जा रही है। यद्यपि किसी परिवार के लिए यह सहायता सम्पूर्ण नहीं कही जा सकती किन्तु अनाज बैंक के द्वारा आरम्भ किया गया यह प्रयास सराहनीय है।” उक्त विचार अनाज वितरण के दौरान उत्तर प्रदेश विधान परिषद के पूर्व सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने व्यक्त किये। कुंवर मानवेन्द्र सिंह आज, 18 मार्च को डॉ० अमिता सिंह के निर्देशन में संचालित बुन्देलखण्ड के पहले अनाज बैंक के अनाज वितरण कार्यक्रम में शामिल होने उरई स्थित जोनल कार्यालय में आये। पूर्व सभापति ने डॉ० अमिता सिंह जी के इस कदम पर प्रसन्नत व्यक्त करते हुए कहा कि उनका परिवार सदा से ही सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता रहा है। ये उसी कार्य का विस्तार है। डॉ० राजीव श्रीवास्तव की यह योजना धरालत पर उतर कर कार्य कर रही है। इस वितरण के साथ यह भी शुभ संकेत देखने को मिला कि अगले माह की पहली तारिख से इच्छुक महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलंबी बनाये जाने की योजना भी है। कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने अनाज बैंक को हरसंभव मदद करने का भरोसा डॉ० अमिता सिंह को दिया।



अनाज बैंक, बुन्देलखण्ड क्षेत्र की महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह ने अनाज बैंक का लाभ ले रही महिलाओं के विकास हेतु एक अप्रैल से उनको सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिए जाने की योजना का शुभारम्भ किया। उन्होंने बताया कि आज कई महिलाओं ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में रुचि दिखाते हुए अपना आवेदन किया है। ऐसी महिलाओं को जो स्व-रोजगार के द्वारा अपने परिवार का भरण-पोषण करना चाहती हैं उनको स्वावलंबी बनाये जाने हेतु यह कदम उठाया गया है। अनाज बैंक का उद्देश्य इन महिलाओं को सिर्फ अनाज देना भर नहीं है वरन उनको आत्मनिर्भर भी बनाना है। इससे इन महिलाओं में आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। प्रशिक्षण पश्चात् इन्हीं महिलाओं के द्वारा निर्मित वस्त्रों और अन्य उत्पादों को अनाज बैंक द्वारा विक्रय के लिए बाजार में उतारा जायेगा। इसमें भी इन्हीं महिलाओं की सहभागिता रहेगी। मार्च माह के इस दूसरे वितरण से लगभग सत्तर महिलाओं को लाभ मिला। 




इस अवसर पर संजना श्रीवास्तव, ममता मिश्रा, रोहित, धर्मेन्द्र, सर्वेश सिंह, डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर आदि सहित अनेक लोग उपस्थित हुए। अप्रैल माह का पहला अनाज वितरण दूसरे रविवार 8 तारीख को किया जायेगा।

Sunday, 4 March 2018

अनाज वितरण के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल


विश्व के पहले अनाज बैंक के संस्थापक और चेयरमैन डॉ० राजीव श्रीवास्तव की प्रेरणा से डॉ० अमिता सिंह के निर्देशन में संचालित बुन्देलखण्ड के पहले अनाज बैंक द्वारा मार्च माह का पहला अनाज वितरण कार्यक्रम उरई स्थित जोनल कार्यालय में संपन्न हुआ। आज का अनाज वितरण प्रसिद्द इतिहासकार देवेन्द्र सिंह और दयानंद वैदिक कॉलेज, उरई के राजनीति विभाग के अध्यक्ष डॉ० आदित्य कुमार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। देवेन्द्र सिंह ने डॉ० अमिता सिंह जी के इस कदम पर प्रसन्नत व्यक्त करते हुए कहा कि उनका परिवार सदा से ही सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता रहा है। ये उसी कार्य का विस्तार है। इस तरह के कार्य से वास्तविक जमीनी कार्य किया जा रहा है। डॉ० राजीव दीक्षित की यह परिकल्पना प्रशंसनीय है। डॉ० आदित्य कुमार ने कहा कि इस कार्य में सभी लोग सहयोग कर रहे हैं. इसके बाद भी अभी बहुत से लोगों को आगे आने की जरूरत है। समाज के सभी लोगों के साथ आने से ही समाज के वंचितों, मजबूरों को सहायता मिलेगी।



अनाज बैंक, बुन्देलखण्ड क्षेत्र की महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह ने बताया कि आज भी लगभग सत्तर महिलाओं को इस योजना का लाभ मिला। कई और महिलाओं के आवेदन इस सम्बन्ध में प्राप्त हुए हैं. अनाज बैंक के नियमानुसार उनका सर्वेक्षण कर जल्द ही जरुरतमंद महिलाओं को इसका लाभ दिया जायेगा। अपनी भावी योजना के बारे में बताते हुए जानकारी दी कि जल्द ही इन्हीं महिलाओं में से सक्षम महिलाओं को स्वावलंबी बनाये जाने सम्बन्धी कदम उठाया जायेगा। इसके लिए सहयोगी लोगों से समुचित बातचीत हो चुकी है। अनाज बैंक का उद्देश्य इन महिलाओं को सिर्फ अनाज देना भर नहीं है वरन उनको आत्मनिर्भर भी बनाना है। इससे इन महिलाओं में आत्मविश्व भी बढ़ेगा तथा अनाज बैंक अधिक से अधिक महिलाओं को मदद कर सकेगा। 




इस अवसर पर संजना श्रीवास्तव, ममता मिश्रा, रोहित, धर्मेन्द्र, मनोज, गणेश शंकर त्रिपाठी, ओंकार पिंडारी, डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर आदि सहित अनेक लोग उपस्थित हुए। मार्च माह का दूसरा अनाज वितरण तीसरे रविवार, 18 तारीख को प्रातः 10 बजे से किया जायेगा।