Sunday, 9 September 2018

अनाज वितरण - सितम्बर 2018 (1) - चित्रावली

वितरण प्रक्रिया संपन्न करते धर्मेन्द्र, रोहित 

लाभार्थी महिला की उपस्थिति 

वजन किया जाता है सभी लाभार्थी महिलाओं का 

पौरिक सिंह राणावत द्वारा वितरण 


वितरण करते सुभाष चंद्रा 


महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह को आशीर्वाद देती बुजुर्ग महिला 

भीख माँग कर अपने परिवार के लिए रोटी की व्यवस्था करने वाली महिला 

खाता खोलकर उसे मदद की गई 

उपस्थित लाभार्थी महिलाएं 


अनाज बैंक, उरई की टीम 

इन्द्रेश कुमार जी के द्वारा अनाज बैंक के क्षेत्रीय कार्यकाल का उदघाटन


कोई भी भूखा न सोये, इस उद्देश्य के साथ काशी में सबसे पहले अनाज बैंक की अवधारणा शुरू हुई। देश में ही नहीं वरन समूचे विश्व में यह अपनी तरह का पहला बैंक है जहाँ लेन-देन, जमा-निकासी सबकुछ अनाज के रूप में होता है। इस बैंक में संतोष के रूप में ब्याज मिलता है और यहाँ काम करने वालों को दुआओं-आशीर्वाद का वेतन मिलता है। यही वो ब्याज और धन है जिसके चलते इन्सान को पुण्य मिलता है। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के केन्द्रीय पदाधिकारी पूज्य इन्द्रेश कुमार जी ने व्यक्त किये। वे आज उरई स्थित अनाज बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय के उद्घाटन अवसर पर उपस्थित थे। विश्व के पहले अनाज बैंक के संस्थापक डॉ० राजीव श्रीवास्तव की प्रेरणा से बुन्देलखण्ड का पहला अनाज बैंक उरई में डॉ० अमिता सिंह के नेतृत्व में नवम्बर 2017 से कार्य कर रहा है। इसके बारे में बोलते हुए माननीय इन्द्रेश जी का कहना था कि अनाज बैंक की केन्द्रीय टीम का यह निश्चय है कि अनाज बैंक का पहले सञ्चालन देखा जायेगा। छह माह तक सुचारू रूप से कार्य करने के बाद ही उसका लोकार्पण किया जाता है। भूखों को अनाज वितरण सम्बन्ध में उनका कहना था कि हमारा देश ही नहीं वरन सम्पूर्ण विश्व भूख की समस्या से पीड़ित है। ऐसे में भरे पेट वालों की जिम्मेवारी बनती है कि वह आगे आये और एक-एक परिवार के लिए भोजन की व्यवस्था करे। बुन्देलखण्ड में भी भूख की समस्या बनी हुई है। उसी को दूर करने की दृष्टि से अनाज बैंक का सञ्चालन यहाँ किया गया है।


इससे पूर्व पूज्य इन्द्रेश जी ने अनाज बैंक का उद्घाटन माँ सरस्वती के चित्र, परम पावन नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन करके तथा फीता काटकर किया। इसके साथ ही उन्होंने हंगर कार्ड, अनाज मुद्रा और अनाज बैंक चेक का भी लोकार्पण किया। इसके द्वारा अनाज वितरण में, भोजन वितरण में और भी आसानी आएगी। मीडिया से वार्ता करते हुए पूज्य इन्द्रेश जी ने बताया कि अनाज बैंक के कार्य को देखकर यूएनओ की एक टीम ने आकर संपर्क किया और वैश्विक स्तर पर भूख की समस्या को दूर करने सम्बन्धी मॉडल स्थापित करने में सहयोग माँगा है। इसके अलावा उन्होंने मीडिया को बताया कि राष्ट्रीय मुस्लिम मंच और विशाल भारत संस्थान मिलकर अभी तक चार हजार से अधिक परिवारों को विशेष स्थिति में अनाज वितरित कर चुका है। इसके अलावा सोलह सौ परिवारों को नियमित रूप से अनाज वितरित किया जाता है। इसके साथ-साथ गरीब बेटियों के विवाह के लिए भी कार्य किया जा रहा है। अपने चार प्रकल्पों की चर्चा करते हुए इन्द्रेश जी ने बताया कि बालक-बालिकाओं के लिए शिक्षा सहायता योजना का सञ्चालन भी किया जा रहा है। इसके अंतर्गत बस्ता, किताबें, ड्रेस आदि का वितरण करने के साथ-साथ अत्यंत गरीब बच्चों की फीस की भी व्यवस्था की जाती है। अभी दो हजार से अधिक बच्चों को इससे लाभान्वित किया जा चुका है। दूसरे प्रकल्प के रूप में तलाक पीड़ित महिलाओं के लिए सहायता उपलब्ध कराइ जा रही है। इसमें नियमित दस साल तक आर्थिक सहायता करने की योजना है। अभी तक सौ से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो चुकी हैं। तीसरे विकल्प के रूप में गरीब, जरूरतमंद बेटियों के विवाह का प्रावधान है। इसमें उनको आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ अन्य जरूरत के सामान की उपलब्धता करवाई जाती है। चौथा प्रकल्प खुदाई खिदमतगार समिति की स्थापना है। बुन्देलखण्ड में जल्द ही इन प्रकल्पों के आरम्भ किये जाने पर विचार किया जायेगा।


अनाज बैंक के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ० राजीव श्रीवास्तव जी ने अपने उद्बोधन में उरई शाखा की तारीफ करते हुए कहा कि यहाँ जिस अनुशासन से कार्य हो रहा है वह प्रशंसनीय है। इसी तरह से एक नेतृत्व में, अनुशासनात्मक रूप में कार्य करने से ही सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय का आव्हान करते हुए कहा कि आप सभी प्रतिमाह अनाज बैंक को अपनी सहायता उपलब्ध करा कर गरीब परिवारों की मदद कर सकते हैं। जिस तरह का अनुशासन, कार्य के प्रति समर्पण, प्रतिबद्धता यहाँ देखने को मिल रही है उससे विशाल भारत संस्थान यहाँ शिक्षा के क्षेत्र में भी सकारात्मक कार्य करने की योजना रखता है। यदि जनपद के लोगों का सहयोग मिलेगा तो जल्द ही यहाँ माननीय इन्द्रेश जी के निर्देशन में विश्वविद्यालय आरम्भ किया जा सकता है। यदि शिक्षा व्यवस्था अच्छी होगी तो निश्चित ही रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और उससे भूख जैसी समस्या से निपटने में आसानी होगी।



अनाज बैंक बुन्देलखण्ड जोन की महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह ने कहा कि उन्होंने अनाज बैंक काशी की के कार्य और संकल्प से प्रभावित होकर अपनी छोटी बहिन अनिला सिंह की स्मृति में इसे आरम्भ किया था। यह सभी बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद है कि आज अस्सी के आसपास महिलाएं अनाज बैंक से लाभान्वित हो रही हैं। और आज हम सबको माननीय इन्द्रेश जी का आशीर्वाद भी मिला। अनाज बैंक, उरई की शाखा निरन्तर सकारात्मकता के साथ कार्य करती रहेगी और कभी भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटेगी। इस अवसर पर परम पूज्य इन्द्रेश कुमार जी ने जनपद के दो सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्मानित भी किया। इसमें विधवा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए विडो क्लब की संस्थापक कौशल्या राज जी को सम्मानित किया गया। उनके इस क्लब के माध्यम से लगभग सत्तर महिलाएं प्रति रविवार एकत्र होकर उनके विचारों का लाभ उठाती हैं। इसके साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहे डॉ० रविकांत शाक्या जी को भी सम्मानित किया गया। ट्री मैन के नाम से प्रसिद्द रविकांत लगातार न केवल पौधारोपण करवा रहे हैं वरन उनकी देखभाल भी कर रहे हैं।



कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को माननीय इन्द्रेश कुमार जी के साथ पारिवारिक बच्चों दुष्यंत सिंह राणावत, हर्षिता सिंह, पौरिक सिंह राणावत, पौरवी सिंह राणावत, वरुणा सिंह तथा उपस्थित जनप्रतिनिधियों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों ने, जनपद के बुद्धिजीवियों ने भी अनाज वितरण में सहयोग किया। उद्घाटन के पश्चात् इन्द्रेश कुमार जी द्वारा पौधारोपण करके स्मृति भी स्थापित की तथा पर्यावरण संरक्षण का सन्देश भी दिया। डॉ० राजीव जी के नेतृत्व में काशी की टीम धनञ्जय सिंह, मृदुला जायसवाल, तंजीम, नाजमा परवीन आदि सदस्य भी उपस्थित रहे। उद्घाटन के इस अवसर पर जिला संघ चालक संतोष त्रिपाठी, प्रयाग नारायण त्रिपाठी, डॉ० प्रभात कुमार, डॉ० आदित्य कुमार, डॉ० अजय सक्सेना, डॉ० राकेश नारायण द्विवेदी, डॉ० के०सी० गुप्ता, ब्रह्मानंद खरे, सुभाष चंद्रा, ब्रजभूषण सिंह मुन्नू, डॉ० राकेश द्विवेदी, सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा, कालपी विधायक नरेन्द्र सिंह जादौन, माधौगढ़ विधायक मूलचंद्र निरंजन, दिनेश चतुर्वेदी,  डॉ० प्रवीण सिंह जादौन, गणेश शंकर त्रिपाठी, ओंकार पिंडारी, धर्मेन्द्र कुमार, रोहित ठाकुर, निशा सिंह, डॉ० विश्वप्रभा त्रिपाठी, डॉ० रचना श्रीवास्तव, अरुण कुमार सिंह, दीपक कुमार, दिगंबर नारायण तिवारी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ० प्रभात कुमार ने तथा सञ्चालन डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने किया।

Tuesday, 21 August 2018

कोई भी भूखा न सोये के उद्देश्य के साथ अनाज बैंक की मुहिम

उत्तर प्रदेश का बुन्देलखण्ड क्षेत्र अनेकानेक प्राकृतिक संपदाओं से संपन्न होने के बाद भी भोजन, पानी की समस्या से परेशान बना रहता है. हालत इस तरह की हो चुकी है कि ग्रामीण अंचलों के बहुतायत गाँवों से युवाओं को पलायन करके शहरी क्षेत्रों की तरफ जाना पड़ रहा है. बारिश की स्थिति विगत कई वर्षों से ऐसी है जिससे सूखे के हालात उत्पन्न होते रहे हैं. खेत के खेत सूखे की चपेट में आ रहे हैं. फसलें खड़े-खड़े बारिश के इंतजार में सूखने लगती हैं. खाद्यान्न की जबरदस्त कमी के चलते बुन्देलखण्ड क्षेत्र के अनेक गाँवों में भुखमरी जैसे हालात पैदा होने लगते हैं. विगत वर्ष कुछ गाँवों से भूख से मौत की खबरें आने के बाद प्रशासनिक लीपापोती शुरू कर दी गई थी. स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि फसलों के अभाव में जानवरों के लिए चारे की भी समस्या उत्पन्न हो जाती है. इसके चलते यहाँ के निवासी अपने पालतू जानवरों को खुला छोड़ देते हैं. जिसके चलते अन्ना समस्या भी बुन्देलखण्ड में विकराल रूप धारण करने लगी है. भूख की स्थिति के कारण ही अनेकानेक अपराधों को प्रश्रय मिलता है. कोई भी व्यक्ति किसी भी स्थिति में बना रह सकता है मगर अपनी भूख के चलते, अपने परिजनों की भूख के चलते, अपने बच्चों की भूख के चलते वह किसी भी तरह के अपराध को करने को प्रवृत्त हो जाता है. भूख ही मनुष्य को अपराध की तरफ ले जाती है, भूख ही उसे मौत की तरफ ले जाती है, भूख ही व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने लगती है.


अभी हाल में दिल्ली में भूख से तीन बच्चियों की मृत्यु के मामले ने सबको झकझोर कर रख दिया. इस एक घटना से ऐसा लगा जैसे समाज से संवेदना एकदम समाप्त हो चुकी है. दिल्ली जैसी जगह में भूख से तीन-तीन बच्चियों की मृत्यु का होना अपने आपमें शर्मनाक स्थिति है. आखिर समाज को क्या होता जा रहा है? सरकारी कदमों, योजनाओं की खिल्ली हम समाज के लोग आये दिन उड़ाते रहते हैं. इसके उलटे कभी एक कदम बढ़कर हम ही आगे क्यों नहीं आते हैं? यह एक ऐसा सवाल है जो उन तमाम लोगों के मुँह बंद करता है जो सिर्फ और सिर्फ तमाशबीन बने समाज को देखते रहते हैं. समाज के अनेकानेक असंवेदित लोगों के मध्य कुछ लोग ऐसे भी हैं जो भूख के खिलाफ पूरी ईमानदारी से लड़ाई लड़ने में लगे हैं. ऐसे ही लोगों में काशी के डॉ० राजीव श्रीवास्तव हैं जो अनाज बैंक के माध्यम से भूख के खिलाफ जंग छेड़े हुए हैं. उनके अनाज बैंक से प्रेरित होकर बुन्देलखण्ड में भी पहला अनाज बैंक उरई शहर में स्थापित किया गया. इसके द्वारा प्रतिमाह दो बार गरीब, असहाय महिलाओं को अनाज की व्यवस्था की जाती है. अनाज बैंक का उद्देश्य है कि कोई भी भूखा न सोने पाए. इसके लिए सामाजिक स्तर से प्राप्त होने वाली मदद के द्वारा गरीब महिलाओं की मदद की जाती है.


अनाज बैंक के द्वारा सिर्फ गरीब महिलाओं की ही नहीं वरन उनकी भी मदद की जाती है जो परिस्थिजन्य भूख से भी पीड़ित हैं. प्राकृतिक आपदाओं के चलते अपने घरों से विस्थापित लोगों को भोजन की व्यवस्था अनाज बैंक द्वारा की जाती है. अभी हाल ही में उरई के कुछ क्षेत्रों में बारिश का पानी भर जाने के कारण बेघर हुए लगभग तीन सौ लोगों को अनाज बैंक, उरई द्वारा दोनों समय भोजन की व्यवस्था की गई. ऐसे में सवाल उठता है कि कैसे भूख से लोगों की मौत हो जाती है? क्या आज भी समाज किसी संस्था, किसी एक व्यक्ति के भरोसे ही बैठा है? क्या एक-एक परिवार इतना भी सक्षम नहीं कि वह अपने बगल के गरीब, मजबूर परिवार को एक समय का भोजन करवा सके? क्या किसी मोहल्ले में इतनी भी संवेदना शेष नहीं कि वह अपने बीच के एक परिवार को सप्ताह में दो-चार दिन भोजन उपलब्ध करवा सके? काशी से विश्व के पहले अनाज बैंक के रूप में शुरू हुआ अभियान अब बुन्देलखण्ड में भी सफलतापूर्वक संचालित है. अनाज बैंक का उद्देश्य यही है कि समाज में कोई भी भूखा न रहे. समाज के लोगों को, समाज के लोगों द्वारा ही जगाने का, भूख से बचाने का काम अनाज बैंक के द्वारा किया जा रहा है. अपेक्षा यही की जा सकती है कि आने वाले दिनों में कोई मृत्यु भूख के कारण न होने पाए.  

Monday, 6 August 2018

बुन्देलखण्ड में भूख से लड़ाई में अनाज बैंक की सराहनीय भूमिका


कोई भी भूखा न सोये के उद्देश्य के साथ संचालित अनाज बैंक का कार्य अत्यंत सराहनीय है. कमजोर, वृद्ध महिलाओं को अनाज वितरण के द्वारा उनकी मदद की पवित्र भावना समस्त सामाजिक कार्यों में सर्वोच्च है. उक्त विचार बुन्देलखण्ड के पहले अनाज बैंक के जोनल कार्यालय, उरई में अनाज वितरण के दौरान ट्री मैन के नाम से प्रसिद्द रवि शाक्या ने व्यक्त किये. अगस्त माह के पहले वितरण को भारतीय रेलवे में सेवारत और सामाजिक कार्यों में सक्रिय, सकारात्मक भूमिका निर्वहन करने वाले रवि शाक्या और गाँधी महाविद्यालय, उरई की मनोविज्ञान विभाग की डॉ० विश्वप्रभा त्रिपाठी द्वारा संपन्न किया गया. रवि शाक्या ने अनाज बैंक के कार्यों और उसकी व्यवस्था देखकर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बुन्देलखण्ड में भुखमरी की समस्या सदैव से रही है और इसके लिए समय-समय पर प्रयास भी किये गए. इसमें अनाज बैंक का प्रयास अग्रणी है. रवि शाक्या ने आगामी वितरण में सहभागिता करने और यथासंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया.


मनोविज्ञान विभाग की डॉ० विश्वप्रभा त्रिपाठी ने वितरण के दौरान विचार व्यक्त करते हुए कहा विश्व के पहले अनाज बैंक को स्थापित करने वाले डॉ० राजीव श्रीवास्तव ने पुनीत कार्य किया है. इससे भी ज्यादा पुनीत कार्य यह किया कि अनाज बैंक की एक शाखा बुन्देलखण्ड में आरम्भ की. इससे न केवल इन महिलाओं को लाभ मिल रहा है वरन अभी हाल में जलभराव के कारण पीड़ित परिवारों को भी अनाज बैंक द्वारा भोजन व्यवस्था प्रदान की गई. 


अनाज बैंक बुन्देलखण्ड जोन की महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह ने अनाज बैंक की भावी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि गत माह अनाज बैंक की केन्द्रीय टीम उरई शाखा के कार्य का अवलोकन करने आई थी. उरई शाखा के कार्य से संतुष्ट होने के कारण अनाज बैंक की अन्य शाखाओं का विस्तार बुन्देलखण्ड में किये जाने की योजना है. अभी हाल ही में अनाज बैंक के चेयरमैन और संस्थापक डॉ० राजीव श्रीवास्तव ने दिल्ली में इस सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा की और अपनी सहमति इस सम्बन्ध में प्रदान की.

अनाज बैंक की केन्द्रीय टीम के द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट से संतुष्ट होने के बाद डॉ० अमिता सिंह को राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, धर्मेन्द्र कुमार को उरई शाखा प्रबंधक और डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर को विशाल भारत संस्थान का मीडिया प्रभारी/प्रवक्ता नामित किया गया. डॉ० अमिता सिंह की बहिन अंजुला सेंगर पहले से ही अनाज बैंक की अंतर्राष्ट्रीय निदेशक हैं. 


आज के वितरण से किरण, परवीन, मानकुंवर, सुशीला, मीना, गुलिश्मा आदि सहित लगभग सत्तर महिलाओं को अनाज वितरित किया गया. इस वितरण में पौरिक राणावत, पौरवी राणावत, मनोज कुमार दिवाकर, धर्मेन्द्र कुमार, रोहित ठाकुर, डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर, फरीद बशर आदि ने भी सहयोग किया.

अनाज वितरण अगस्त 2018 (1) - चित्र


रविकांत शाक्य 


सक्रियता से लगी टीम 

लाभार्थी महिलाएं 

उपस्थित लोग 

डॉ० विश्वप्रभा त्रिपाठी 


मनोज दिवाकर 

हस्ताक्षर करवाते शाखा प्रबंधक धर्मेन्द्र कुमार 

वृद्ध लाभार्थी महिला तक मदद पहुँचाते टीम सदस्य 

उपस्थित लाभार्थी महिलाएं 

पौरवी राणावत 


पौरिक राणावत 


रोहित ठाकुर 


Friday, 3 August 2018

राजीव जी राज्य बालक अधिकार संरक्षण आयोग, उ०प्र० में सदस्य

अनाज बैंक के संस्थापक-चेयरमैन डॉ० राजीव श्रीवास्तव जी को बधाई एवं शुभकामनायें. 
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राजीव जी को राज्य बालक अधिकार संरक्षण आयोग, उ०प्र० में सदस्य के रूप में नामित किया गया है.



Friday, 27 July 2018

बारिश पीड़ित निवासियों को अनाज बैंक द्वारा भोजन वितरण


भूखे व्यक्ति को भोजन करवाना समाज में सर्वाधिक पुनीत कार्य माना जाता है। बुन्देलखण्ड के पहले अनाज बैंक द्वारा यह पुनीत कार्य माह में दो बार अनाज वितरण के द्वारा किया जा रहा है। दो दिन से हो रही जल-वृष्टि से अपना कच्चा घर, सामान, खाद्य-सामग्री आदि गँवा चुके लोगों को अनाज बैंक के उरई स्थित क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा मदद की गई। अनाज बैंक के सदस्यों द्वारा आज लहरियापुरवा के बाढ़ पीड़ितों के भोजन की व्यवस्था की गई। विगत दो दिन की बारिश में उरई के लहरियापुरवा क्षेत्र के कुछ कच्चे मकान गिर गए और बहुत से घरों में जलभराव की स्थिति बन गई। जिसके चलते वहां के निवासियों का घरों में रहना मुश्किल हो गया था। जलभराव और कच्चे मकान ध्वस्त होने से परेशान वहाँ के पुरुषों, महिलाओं, बच्चों को मोहल्लेवासियों की सहायता से लहरियापुरवा में ही राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के अंतर्गत निर्मित आशय गृह (शेल्टर हाउस) में अस्थायी तौर पर निवास की व्यवस्था की गई।



अनाज बैंक उरई को इसके बारे में जानकारी मिलते ही उसके संवेदनशील सदस्यों ने तुरंत आश्रय गृह पहुँचकर जलभराव पीड़ित नागरिकों की समस्याओं को जाना-समझा। अनाज बैंक की बुन्देलखण्ड जोन की महाप्रबंधक डॉ० अमिता सिंह ने तत्काल अनाज बैंक को खुलवाकर आश्रय गृह में अस्थायी तौर पर निवास कर रह रहे लगभग एक सौ पचास बारिश से पीड़ित नागरिकों की भोजन व्यवस्था का प्रबंध किया। उन्होंने अनाज बैंक के परिसर में अपनी देख-रेख में भोज्य-सामग्री को बनवाकर पैकेट बनवाकर वितरण हेतु भिजवाए। उन्होंने कहा कि अनाज बैंक का मुख्य उद्देश्य किसी को भूखा न रहने देना है और उसी की दृष्टि से यह कार्य किया जा रहा है।
आश्रय गृह में रह रहे बच्चों, महिलाओं, वृद्धजनों, पुरुषों को भोजन वितरण में धर्मेन्द्र, मनोज दिवाकर, रोहित ठाकुर, अमर कुमार, डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने सहयोग किया। आश्रय गृह में शरण लिए लोगों ने इसके लिए अनाज बैंक टीम का आभार व्यक्त किया और इसे अनमोल सहायता बताया। सदस्यों ने उनको आश्वासन दिया कि उन सबकी यथासंभव मदद की जाएगी और इसी कड़ी में शाम को भी अनाज बैंक द्वारा भोजन वितरण की व्यवस्था की गई है।